ईडी: बिना लाइसेंस के दवाओं के लेबल बदलते थे, जेनेरिक दवा पर ब्रांडेड लेबल लगा होती थी नई पैकिंग ED: Drug labels were being altered without a license; generic medicines were being repackaged with branded labels.
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- ईडी: बिना लाइसेंस के दवाओं के लेबल बदलते थे, जेनेरिक दवा पर ब्रांडेड लेबल लगा होती थी नई पैकिंग ED: Drug labels were being altered without a license; generic medicines were being repackaged with branded labels
प्रशांत ने कथित तौर पर बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था, जहां बिना किसी ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं का निर्माण, रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग की जाती थी। अलग-अलग राज्यों के निर्माण केंद्रों से खरीदी गई सस्ती दवाओं को कथित तौर पर नई शीशियों में पैक किया जाता था। उन पर धोखाधड़ी से फाइजर की महंगी एंटीबायोटिक दवाओं—जैसे ज़ाविसिफ्टा, एम्बलेवियो आदि के लेबल लगा दिए जाते थे। इन शीशियों में असल में जेनेरिक दवाएं होती थीं, लेकिन उन पर फाइजर ब्रांड के लेबल लगे होते थे। कथित तौर पर, इन दवाओं को 'एम/एस डीएम फार्मास्यूटिकल्स' के जरिए बांटा जाता था। उन्हें 'एम/एस कृपा हेल्थकेयर' को सप्लाई किया जाता था। इसके बाद, 'एम/एस कृपा हेल्थकेयर' इन्हें अन्य दवा कंपनियों और अस्पतालों को सप्लाई करता था, जहां असली दवाओं के साथ-साथ ये नकली दवाएं भी भेजी जाती थीं, ताकि किसी को शक न हो। तलाशी अभियान के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिनमें लगभग 9,00,000 रुपये जमा थे। इसके अलावा, तलाशी के दौरान कई लोगों से जुड़े डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और अपराध से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए।