Yamraj Puja on Diwali: दीपावली पांच दिनों का महापर्व है, जिसे यम पंचक भी कहते हैं। इन पांचों दिनों में यमराज की पूजा और दीपदान का विशेष महत्व है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- Yamraj Puja on Diwali: दीपावली केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि पूरे पांच दिनों का एक महाउत्सव है। शास्त्रों में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक की इन पांच पावन तिथियों के समूह को 'यम पंचक' कहा जाता है। यह समय मृत्यु के देवता यमराज की विशेष आराधना के लिए समर्पित है। यम पंचक न केवल दीप जलाने का पर्व है, बल्कि यह कठोपनिषद के प्रसिद्ध 'यम-नचिकेता संवाद' की भी याद दिलाता है, जो हमें जीवन, मृत्यु और आत्मा के गूढ़ रहस्य का बोध कराता है। पांचों दिन संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा (यम की दिशा) में यमदेव के निमित्त दीपक जलाया जाता है। जानिए इन पांचों दिनों में यम पूजन का क्या महत्व और विधान है।
- महत्व व पूजा: इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ रात में यमराज के लिए विशेष दीपदान (यम दीपम) किया जाता है।
- मान्यता: धनतेरस की शाम को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर दक्षिण दिशा में रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु (असमय संकट) से रक्षा करते हैं।
महत्व व पूजा: इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ रात में यमराज के लिए विशेष दीपदान (यम दीपम) किया जाता है।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
मान्यता: धनतेरस की शाम को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर दक्षिण दिशा में रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु (असमय संकट) से रक्षा करते हैं।
Yama Deepam 2026: धनतेरस पर कब जलाया जाता है यम दीपक? जानें महत्व, पूजा विधि और धार्मिक मान्यता
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
महत्व व पूजा: दीपावली की मुख्य रात्रि को प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की महापूजा के पश्चात यमदेव के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है। विशेष लोक परंपरा (काग व कुक्कुर तिहार): नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में दिवाली के दौरान कौओं और कुत्तों की पूजा की परंपरा है। 'काग तिहार' में कौओं को भोजन कराया जाता है (जो यमराज के संदेशवाहक हैं) और 'कुक्कुर तिहार' पर कुत्तों की पूजा कर उन्हें माला व भोजन दिया जाता है (जो यमदेव के रक्षक माने जाते हैं)। इन्हें प्रसन्न करने से यमराज का आशीर्वाद बना रहता है।
गोवर्धन पूजा/अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
महत्व व पूजा: यद्यपि यह दिन मुख्य रूप से प्रकृति, गौ-धन और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर 56 भोग लगाया जाता है और गाय-बैलों को सजाकर उनकी आरती उतारी जाती है। यम पूजन परंपरा: दिन भर गोवर्धन और गौ-पूजन के बाद रात में सोने से पूर्व यमदेव की कृपा और घर की सुरक्षा के लिए दक्षिण दिशा में दीया जलाने की प्राचीन परंपरा है।