दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता वायु प्रदूषण और ब्लैक कार्बन लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं। डीजल गाड़ियों, फैक्ट्रियों और ईंधन जलने से निकलने वाले ये बारीक कण फेफड़ों और दिल को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- दिवाली में अभी भी 4-5 दिन शेष हैं, इससे पहले ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का असर दिखना शुरू हो गया है। बढ़ते प्रदूषण का स्तर लोगों की सेहत के लिए भी चिंता बढाता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि हवा में घुला जहरीला धुआं, धूल और बारीक प्रदूषण कण सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचकर फेफड़ों से लेकर दिल और ब्रेन तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
- अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में पराली जलाने से हवा में हानिकारक ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ा रही है। इसका असर सेहत पर पड़ रहा है। पीयू, पीजीआई और आईआईटी दिल्ली की स्टडी में सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की हवा में मौजूद ब्लैक कार्बन का 48% हिस्सा फसल अवशेष जलाने से निकलता है। पंजाब में पराली का प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर के साथ हरियाणा, यूपी और आसपास के राज्यों को भी प्रभावित कर रहा है।
- कृषि अवशेष जलने से निकलने वाले बारीक काले कण ब्लैक कार्बन कहलाते हैं। यह पीएम 2.5 का प्रमुख हिस्सा है और हवा में तैरता रहता है। कई अध्ययनों में इससे प्रदषित हवा को सेहत के लिए गंभीर समस्याएं बढ़ाने वाला पाया गया है। यह वही काला धुआं जैसा पदार्थ है, जो डीजल गाड़ियों, लकड़ी या पराली जलाने से निकलता है।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में पराली जलाने से हवा में हानिकारक ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ा रही है। इसका असर सेहत पर पड़ रहा है। पीयू, पीजीआई और आईआईटी दिल्ली की स्टडी में सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की हवा में मौजूद ब्लैक कार्बन का 48% हिस्सा फसल अवशेष जलाने से निकलता है। पंजाब में पराली का प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर के साथ हरियाणा, यूपी और आसपास के राज्यों को भी प्रभावित कर रहा है।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
कृषि अवशेष जलने से निकलने वाले बारीक काले कण ब्लैक कार्बन कहलाते हैं। यह पीएम 2.5 का प्रमुख हिस्सा है और हवा में तैरता रहता है। कई अध्ययनों में इससे प्रदषित हवा को सेहत के लिए गंभीर समस्याएं बढ़ाने वाला पाया गया है। यह वही काला धुआं जैसा पदार्थ है, जो डीजल गाड़ियों, लकड़ी या पराली जलाने से निकलता है।
पहले जानिए एक्यूआई 400 पार होना कितना खतरनाक है?
दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच रही है। मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर हिस्सी में एक्यूआई 400 के पार रहा, बुधवार को भी कमोबेश यही स्थिति देखी गई है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
ब्लैक कार्बन को आम भाषा में कालिख कहा जाता है। डीजल गाड़ियों के धुएं, कोयला-लकड़ी या दूसरे जैविक ईंधन के जलने से ब्लैक कार्बन निकलता है। पराली जलना इसके खतरे को काफी बढ़ा देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, ब्लैक कार्बन भी पीएम2.5 कणों का हिस्सा है। ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में अभी से एक्यूआई 400 के पार हो गया है, विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है। ऐसे में सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहना चाहिए।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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