बॉलीवुड की मेगा बजट फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ रिलीज हो चुकी है। इसे ‘दंगल’ फेम निर्देशक नितेश तिवारी ने निर्देशित तो किया है पर यह फिल्म पूरी तरह प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की है। क्यों? इसका जवाब हम आपको इस रिव्यू में देंखे।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- साल 2017 में यह घोषणा हुई थी कि प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा बड़े परदे के लिए 'रामायण' बनाने जा रहे हैं। यह एक मेगा बजट फिल्म होगी जिसका उद्देश्य महाकाव्य रामायण और बॉलीवुड की ताकत को दुनिया से रूबरू कराना होगा। बनते-बनते फिल्म से कई नामी और बड़े कलाकार भी जुड़ते गए और फैंस की उम्मीदें भी। फिल्म का बजट 4000 करोड़ हो गया और यह हिंदुस्तान में बनी सबसे महंगी फिल्म भी हो गई। फिल्म से बतौर निर्देशक नितेश तिवारी जुड़े। फिर राम के किरदार में रणबीर कपूर, सीता के किरदार में साई पल्लवी और रावण के किरदार में यश की कास्टिंग हो गई।
- यह फिल्म शुरू होती अनुपम खेर की आवाज से। अनुपम खेर ने पक्षीराज जटायु को फिल्म में अपनी आवाज दी है। वह बताते हैं कि यह कहानी आज की नहीं सदियों पुरानी है जब देवाें और असुरों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। तब देवराज इंद्र ने असुरों को हराकर लंका का राज कुबेर को सौंप दिया था। इसके बाद लंका में राक्षस कुल धरातल के नीचे दरिद्र जीवन जीने पर विवश हो गया था। तब महारानी कैकसी ने अपने पुत्र दशानन को अपना राज्य वापस पाने के लिए प्रेरित किया।
- मां की बात सुनकर दशानन ने ऐसी भीषण तपस्या की कि पृथ्वी उसके ताप से जलने लगी और भगवान ब्रह्मा को प्रकट होना पड़ा। दशानन ने उनसे अमरता का वरदान मांगा पर अहंकार में वह यह मांगना भूल गया कि उसे कोई मनुष्य ना मार सके।
यह फिल्म शुरू होती अनुपम खेर की आवाज से। अनुपम खेर ने पक्षीराज जटायु को फिल्म में अपनी आवाज दी है। वह बताते हैं कि यह कहानी आज की नहीं सदियों पुरानी है जब देवाें और असुरों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। तब देवराज इंद्र ने असुरों को हराकर लंका का राज कुबेर को सौंप दिया था। इसके बाद लंका में राक्षस कुल धरातल के नीचे दरिद्र जीवन जीने पर विवश हो गया था। तब महारानी कैकसी ने अपने पुत्र दशानन को अपना राज्य वापस पाने के लिए प्रेरित किया।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
मां की बात सुनकर दशानन ने ऐसी भीषण तपस्या की कि पृथ्वी उसके ताप से जलने लगी और भगवान ब्रह्मा को प्रकट होना पड़ा। दशानन ने उनसे अमरता का वरदान मांगा पर अहंकार में वह यह मांगना भूल गया कि उसे कोई मनुष्य ना मार सके।
वरदान पाकर दशानन से सबसे पहले कुबेर से अपनी लंका वापस छीनी और फिर तीनों लोकों का स्वामी बन गया। उसके बढ़ते अत्याचारों को देखकर भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया और फिर वही सब हुआ जो बचपन से लेकर अब तक ‘रामायण’ पर बने टीवी शोज और फिल्मों में देखते आए हैं।
फिल्म के शुरुआती 40 मिनट में रावण, उसके बदले और उसकी ताकत दिखाई जाती है। यह सब कुछ बतौर दर्शक आपके लिए काफी नया है और इसे जिस तरीके से पेश किया गया है वह देखने में बहुत मजा आता है। जिन चीजों की आपने आज तक कल्पना की हो उनको विजुअली इतना खूबसूरत देखने पर आप चकित रह जाएंगे। देवराज इंद्र का उड़ता हुआ ऐरावत, समंदर की गहराई में भगवान विष्णु के दर्शन, रावण की तपस्या के ताप से जलती हुई पृथ्वी… यह सब विजुअली आपको मोह लेगे। पर एक ओर जहां विजुअली इतनी मेहनत की गई वहीं दूसरी ओर रावण का देवों के साथ हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट, असुरों की सेना में वीएफएक्स से बने राक्षस और कुछ दृश्यों में रावण का एट्टीट्यूड खटकता है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
रावण के लंकापति बन जाने के बाद कहानी अयोध्या रुख करती है और फिर प्रभु श्रीराम के जन्म से लेकर उनके वनवास जाने तक के प्रसंग अगले एक घंटे में पेश किए जाते हैं। यहां भी जाे काम वीएफएक्स से किया गया है वह खूबसूरत दिखता है। आयोध्या की खूबसूरती, वन में राक्षसों से युद्ध, सीता स्वयंवर से लेकर वनवास प्रस्थान तक हर जगह जहां बाहर की दुनिया पेश की गई है वो कमाल है। पर जैसे ही किसी सीन में सारा दारोमदार अभिनय पर आता है, फिल्म लड़खड़ाती है। राम के जन्म से लेकर उनके वनवास जाने तक के प्रसंग इतनी तेजी में दिखाए गए हैं कि आप ना तो राम के किरदार से जुड़ाव महसूस कर पाते हैं ना सीता के। ऐसे में राम और सीता के बीच संवाद वाले दृश्य बनावटी लगते हैं।
इसी तरह रावण की लंका में भव्यता तो है पर किरदार कहीं नहीं। पूरी फिल्म में मंदोदरी बनीं काजल अग्रवाल का सिर्फ एक डायलॉग है। पूरी लंका में सिर्फ रावण, शूर्पणखा और उसके पति विद्युतजिह्वा तीन ही किरदारों को अभिनय दिखाने का मौका मिला है। बाकी सब काम तो वीएफएक्स ने कर दिया।
फिल्म के सबसे अहम पहलू अभिनय की बात करें तो इसमें यश सबसे आगे रहेंगे। यकीनन फिल्म उनके इर्द-गिर्द ज्यादा बुनी गई है। वहीं, अयोध्या नरेश राजा दशरथ के किरदार में जाे इमोशंस अरुण गोविल ने पेश किए हैं वह पूरी फिल्म में कोई और नहीं कर पाया। उन्होंने यह साबित किया कि वीएफएक्स के जमाने में भी अभिनय कितना अहम है।
यश: रावण का किरदार समझना आसान नहीं पर यश ने यहां भी जी-तोड़ मेहनत की है। रावण का अहंकार उनके अभिनय में झलकता है पर जहां बात एक्शन की आती है तो रावण को हैंड टू हैंड कॉम्बैट करते देखकर ऐसा लगत है जैसे यश की कोई एक्शन फिल्म देख रहे हों। बाकी सबसे अच्छी बात यह रही कि मेकर्स ने उनकी आवाज को ‘बाहुबली’ को आवाज देने वाले कलाकार शरद केलकर से डब करवाया। शरद ने यहां यश का आधे से ज्यादा की जिम्मेदारी अच्छे से संभाल ली।
रणबीर कपूर: पूरी फिल्म में रणबीर यह कोशिश करते दिखे कि वह शालीन लगें। राम की तरह धीमे बात करें पर इस पूरी कोशिश में वह स्क्रीन पर घबराये से नजर आए। कहीं दृश्यों में नोटिस करेंगे तो वह वाकई कांपते दिखे। हरे परदे पर फिल्माए गए एक्शन सीन में वह अच्छे हैं। जटायु के साथ संवाद वाले सीन में उनके इमोशंस निखकर आए पर बाकी जगहों पर ना तो उनको बड़े संवाद दिए गए और ना ही उनके किरदार को उतना ग्लोरिफाई किया गया, जितना रावण को किया गया। दूसरी तरफ परशुराम के किरदार में उन्होंने अपनी आवाज तो बदल ली पर वो वजन नहीं ला पाए।