सुप्रीम कोर्ट में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान जज ने पत्नी की पॉकेट मनी की मांग पर दिलचस्प टिप्पणी की और अपनी सैलरी का जिक्र किया।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान जज ने पत्नी की पॉकेट मनी की मांग पर दिलचस्प टिप्पणी की और अपनी सैलरी का जिक्र किया।
- पत्नी के पॉकेट मनी मांगने पर सुप्रीम कोर्ट की अनोखी टिप्पणी।
- जज ने पत्नी की पॉकेट मनी मांग पर की दिलचस्प टिप्पणी।
पत्नी के पॉकेट मनी मांगने पर सुप्रीम कोर्ट की अनोखी टिप्पणी।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
जज ने पत्नी की पॉकेट मनी मांग पर की दिलचस्प टिप्पणी।
सुप्रीम कोर्ट के जज ने अपनी मासिक सैलरी का किया जिक्र।
विदेशी तलाक आदेश भारत में मान्य नहीं, भारतीय कानूनों का पालन आवश्यक।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 4 नंवबर, 2026 (बुधवार) को वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जज ने एक दिलचस्प टिप्पणी की और जज साहब खुद की सैलरी बताने लगे। दरअसल, एक महिला ने अपने पति से सभी खर्च देने के अलावा 1500 डॉलर हर महीने पॉकेट मनी अलग से देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन कर रहे थे। इस दौरान पीठ ने कहा कि इस तरह के आइडिया पत्नियों को नहीं दिए जाने चाहिए। ये बेहद ही खतरनाक है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "क्या पति को 'पॉकेट मनी' देनी पड़ेगी? यह तो बहुत खतरनाक स्थिति है। कल को हमारी पत्नियां भी कहेंगी कि उन्हें पॉकेट मनी चाहिए। और हमारी सैलरी तो महीने की बस 3 लाख रुपये है कोई 15,000 डॉलर महीना तो नहीं! कृपया यहां मौजूद महिलाओं को ऐसे शानदार आइडिया न दें।"
बेंच ने आगे कहा कि अगर अतिरिक्त पॉकेट मनी की मांग की जाती है जबकि पति पहले ही बाकी सारे खर्च उठा रहा है तो इससे एक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
इस बीच, वैवाहिक मामलों से जुड़े एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश (डिक्री) को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की। विदेशी अदालत ने इस आधार पर तलाक मंजूर किया था कि पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे आधार पर दिए गए तलाक के आदेश को भारत में कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता।