किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर तंज: कहा- विदेश के गुप्त दौरे बंद करें; भाजपा को सियासी विरोधी मानने की दी सलाह- Kiren Rijiju dig Rahul Gandhi Tells him stop secret foreign trips and advises him view BJP political opponent
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस चुनाव में ज्यादा सीटें जीतना चाहती है, तो उसके नेताओं को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। रिजिजू ने राहुल गांधी के सामने सात शर्तें रखते हुए कहा कि अगर वे इन पर अमल करें तो कांग्रेस के सांसदों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर ये बातें कहीं। Congress Party can win more MPs if Rahul Gandhi ji can do these: 1
- Spend more time in India and avoid secret foreign vacations frequently. 2
- Respect seniors and gain valuable wisdom from the elders, which is Indian tradition. 3
Spend more time in India and avoid secret foreign vacations frequently. 2
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
Respect seniors and gain valuable wisdom from the elders, which is Indian tradition. 3
Do not meet Anti-India people and stop promoting their agenda. 4
End deep hatred against BJP, RSS & Modi Ji
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
Treat BJP as political opponent, not enemy. 5
Take Parliament more seriously and let MPs take part in debates & discussion. 6
Respect Constitution of India, and honour Constitutional Institutions. 7
Allow Congress party to function as a democratic party and smash dynastic politics.— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) November 4, 2026 भारत में ज्यादा समय बिताने की दी सलाह रिजिजू ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें भारत में ज्यादा समय बिताना चाहिए और बार-बार विदेश जाकर छुट्टियां मनाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल को अपने से वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना चाहिए और उनके अनुभव से सीख लेनी चाहिए। रिजिजू के मुताबिक, बड़ों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। भारत विरोधी लोगों से मिलने पर उठाए सवाल केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को यह भी नसीहत दी कि उन्हें भारत विरोधी लोगों से मुलाकात नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोगों के एजेंडे को बढ़ावा देने से भी बचना चाहिए। रिजिजू का कहना था कि देश के हितों के खिलाफ काम करने वालों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और वहां होने वाली मुलाकातों को लेकर भी तंज कसा। भाजपा और मोदी के प्रति नफरत छोड़ने को कहा रिजिजू की तीसरी और चौथी नसीहत में राहुल गांधी से भाजपा, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी नफरत खत्म करने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि राहुल को भाजपा को अपना राजनीतिक विरोधी मानना चाहिए, न कि दुश्मन। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन विरोध को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। संसद में गंभीरता से हिस्सा लेने की नसीहत रिजिजू ने राहुल गांधी से संसद की कार्यवाही को गंभीरता से लेने और कांग्रेस सांसदों को बहस में हिस्सा लेने देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि संसद का काम चर्चा और बहस करना है। ऐसे में सभी दलों के सांसदों को सदन में अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस को भारतीय संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की सलाह दी। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को एक लोकतांत्रिक पार्टी की तरह काम करना चाहिए और परिवारवाद की राजनीति खत्म करनी चाहिए। ये उनकी सात शर्तों में शामिल आखिरी बातें थीं। विपक्ष के वॉकआउट पर भी किया कटाक्ष रिजिजू ने बुधवार को संसद में दिए अपने भाषण का एक वीडियो भी एक्स पर साझा किया। यह वीडियो उस समय का था, जब विपक्षी सांसद सदन से बाहर चले गए थे। इस पर उन्होंने कहा कि संसद बहस और चर्चा के लिए है, लेकिन जो लोग खुद लोकतंत्र और चर्चा में विश्वास नहीं करते, वे आज खुली बहस की मांग कर रहे हैं। खरगे ने वोट चोरी के मुद्दे पर मांगा जवाब खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री को सामने आकर देश के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी के पास वोट चोरी के मुद्दे पर कोई जवाब नहीं है। खरगे ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी है, ताकि विदेशी ताकतों के सामने भारत के हितों को कमजोर करने के आरोपों पर चर्चा हो सके। 'दिमागी नक्सल' बयान पर रिजिजू का पलटवार खड़गे के बयान पर जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि 'दिमागी नक्सल' कोई राजनीतिक नैरेटिव नहीं, बल्कि एक शब्द है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग माओवादियों के एजेंडे का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते। उनके मुताबिक, अलगाववादियों का साथ देने, अनुच्छेद 370 का समर्थन करने और देश के विकास कार्यों में रुकावट डालने वाले लोग भी इसी सोच का हिस्सा हैं। ये भी पढ़ें: 'हां, मैं बीवी पगलू हूं': ओवैसी ने ऐसा क्यों कहा; सुकून से जीने का भी फॉर्मूला बताया; क्या है पूरा मामला? विदेशी ताकतों के मुद्दे पर भी बढ़ा विवाद इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर देश को अस्थिर करने के लिए विदेशी ताकतों की मदद लेने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर ही विदेशी मदद से सत्ता तक पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री को उनके आरोप गलत लगते हैं, तो वे उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं करते?