चुनाव आयोग ने अब उन सभी राज्यों में फॉर्म-6 से घोषणा पत्र को अलग कर दिया है, जहां मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण चल रहा है या हो चुका है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- चुनाव आयोग ने अब उन सभी राज्यों में फॉर्म-6 से घोषणा पत्र को अलग कर दिया है, जहां मतदाता सूची ...और पढ़ें
- फॉर्म-6 से घोषणा पत्र अब सभी राज्यों में अलग।
- विशेष सघन पुनरीक्षण में फॉर्म-7 के 10 आवेदन।
फॉर्म-6 से घोषणा पत्र अब सभी राज्यों में अलग।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
विशेष सघन पुनरीक्षण में फॉर्म-7 के 10 आवेदन।
सामान्य पुनरीक्षण में फॉर्म-7 के 5 आवेदन।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र को जोड़े जाने को लेकर खड़े किए जा रहे सवालों के बीच अब उन राज्यों में भी फार्म-6 से घोषणा पत्र को अलग कर दिया है, जहां मौजूदा समय में मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) चल रहा है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
इससे पहले जिन राज्यों में एसआईआर का काम हो चुका था या शुरू नहीं हुआ था, उन राज्यों में भी घोषणा पत्र को फार्म- 6 से अलग कर दिया गया था। यह बदलाव फिजिकल और ईसीआई नेट के जरिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 दोनों में किया गया है।
आयोग के इस बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिनों दिए गए हलफनामे से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें आयोग ने बताया था कि जिन राज्यों में एसआईआर हो चुका है, उन राज्यों में फॉर्म- 6 से घोषणा पत्र को पहले ही अलग कर दिया गया है। हालांकि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपे हलफनामें में यह साफ किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि उसके साथ घोषणा पत्र को एसआईआर के दौरान लोगों की सहूलियत के लिए जोड़ा गया था।
ताकि ऑनलाइन आवेदन के दौरान दोनों को अलग-अलग भरने की जरूरत न पड़े और दोनों के लिए अलग-अलग ओटीपी देने की जरूरत न पड़े। इसको फॉर्म-6 के साथ जोड़ने से यह एक ही बार ओटीपी और ई-साइन से जमा हो जाता था। लेकिन इससे एक बड़ी परेशानी यह थी कि घोषणापत्र भरे बगैर आवेदक आगे ही नहीं बढ़ पाता था।
आयोग ने इसके साथ ही हाल में अपनी प्रक्रिया में एक और जो बड़ा बदलाव किया है, उनमें मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दिए जाने वाले फॉर्म-7 की संख्या सीमित कर दी है। जिसके तहत अब कोई एक पंजीकृत मतदाता पूरी एसआईआर अवधि के दौरान सिर्फ दस आवेदन ही दे सकता है।
सामान्य पुनरीक्षण के दौरान वह फॉर्म-7 के सिर्फ पांच आवेदन ही दे सकता है। पहले इनकी कोई संख्या तय नहीं है। जिसके चलते कर्नाटक में एक व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में फार्म-7 जमा कराए जाने का मामला सामने आया था।