दिल्ली की हवा लगातार ख़राब हो रही है. सर्दियां आते ही प्रदूषण बढ़ जाता है. मगर ये हर साल क्यों होता है? सरकार इसके लिए जो कोशिश कर रही है क्या वो सफल क्यों नहीं हो रही है?
प्रमुख बातें (Key Highlights):
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- 31 अक्तूबर को दिल्ली का औसत एक्यूआई 117 था
- एक नवंबर को यह बढ़कर 261 और दो नवंबर को 324 पर पहुंच गया
31 अक्तूबर को दिल्ली का औसत एक्यूआई 117 था
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
एक नवंबर को यह बढ़कर 261 और दो नवंबर को 324 पर पहुंच गया
यानी केवल दो दिनों में देश की राजधानी की हवा 'मध्यम' से 'बहुत ख़राब' हो गई
एक्यूआई से पता चलता है कि किसी जगह की हवा कितनी साफ़ या प्रदूषित है
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
इसका आंकड़ा जितना बढ़ता है, हवा उतनी ही ख़राब मानी जाती है
हवा बिगड़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का दूसरा चरण लागू कर दिया
ग्रैप वह व्यवस्था है, जिसके तहत प्रदूषण बढ़ने पर अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लगाई जाती हैं
तीन नवंबर की सुबह आठ बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई बढ़कर 330 हो गया
हालात ऐसे थे कि जिन इलाक़ों में लोग अपनी छतों से दूर तक दिल्ली के स्मारक साफ़ देख पाते थे, वहां देखने की दूरी घटकर 100 मीटर से भी कम रह गई