कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक लगातार 5 पर्व होते हैं। शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा गया है। इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धन्वंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान, काली और गोवर्धन पूजा का विधान है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक लगातार 5 पर्व होते हैं। शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा गया है। इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धन्वंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान, काली और गोवर्धन पूजा का विधान है। आइए जानते हैं यम पंचक में कौन-कौन से 5 पर्व शामिल हैं। 1
- धनतेरस धनतेरस धन, सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व है
- यह पर्व कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाएगा । कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।इस दिन का मुख्य संबंध यमराज की आराधना से है। आयुर्वेद के प्रवर्तक धनवंतरि की जयंती भी इसी दिन होती है। यम दीप जलाना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण है,शाम को यमराज के निमित्त दीप जलाकर घर के दरवाजे के बाहर रखना चाहिए। इस दिन लक्ष्मी पूजन की परंपरा भी है। लोक मान्यता के अनुसार इस दिन स्वर्ण या रजत मुद्राएं अथवा बर्तन खरीदना शुभ होता है। धनतेरस के शुभ मुहूर्त -शुभ चौघड़िया- सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 1बजकर 15 मिनट तक - चर चौघड़िया- सायं काल 4 बजे से सायं काल 5 बजकर 23 मिनट तक - लाभ चौघड़िया- रात्रि 8 बजकर 37 से रात्रि 10 बजकर 15 मिनट तक - शुभ चौघड़िया- रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से रात्रि 1 बजकर 29 मिनट तक 2
धनतेरस धनतेरस धन, सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व है
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
यह पर्व कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाएगा । कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।इस दिन का मुख्य संबंध यमराज की आराधना से है। आयुर्वेद के प्रवर्तक धनवंतरि की जयंती भी इसी दिन होती है। यम दीप जलाना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण है,शाम को यमराज के निमित्त दीप जलाकर घर के दरवाजे के बाहर रखना चाहिए। इस दिन लक्ष्मी पूजन की परंपरा भी है। लोक मान्यता के अनुसार इस दिन स्वर्ण या रजत मुद्राएं अथवा बर्तन खरीदना शुभ होता है। धनतेरस के शुभ मुहूर्त -शुभ चौघड़िया- सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 1बजकर 15 मिनट तक - चर चौघड़िया- सायं काल 4 बजे से सायं काल 5 बजकर 23 मिनट तक - लाभ चौघड़िया- रात्रि 8 बजकर 37 से रात्रि 10 बजकर 15 मिनट तक - शुभ चौघड़िया- रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से रात्रि 1 बजकर 29 मिनट तक 2
नरक चतुर्दशी नरक चतुर्दशी को नरका चौदस और हनुमान जयंती के रूप में भी प्रतिष्ठा प्राप्त है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 07 नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 08 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा।नरक चतुर्थी के दिन रूप निखारा जाता है, जिसके लिए प्रात: काल स्नान की परंपरा है। इसलिए उदया तिथि को देखते हुए नरक चतुर्दशी 08 नवंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन बड़ी दिवाली भी है। हालांकि जो लोग मां काली, हनुमान जी और यमदेव की पूजा करते हैं वे 07 नवंबर शनिवार को नरक चतुर्थी यानी छोटी दिवाली का पर्व मनाएंगे। शास्त्रतीय मान्यताओं अनुसार के इस दिन शाम को चार बातियों वाला दीपक घर के बाहर कूड़े के ढेर पर जलाना चाहिए। खास बात यह कि दीपक पुराना होना चाहिए। इसके पीछे मान्यता यह है कि स्थान चाहे कोई भी हो शुभता का वास हर जगह है। समय विशेष पर उसका महत्व होता है। नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय के पूर्व शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करने की प्रक्रिया को अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इस बार अभ्यंग स्नान का समय 08 नवंबर रविवार को सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 22 मिनट तक है। 3
दीपावली दीपावली सनातनी परंपरा में रात में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में एक है। शिवरात्रि, होलिका दहन, शरद पूर्णिमा की भांति ही दीपावली में भी संपूर्ण रात्रि जागरण का विधान है। इस साल दीपावली 08 नवंबर, रविवार के दिन पड़ रही है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है, इसलिए इस दिन शाम के समय घर के द्वार खुले रखे जाते हैं। दीपावली के शुभ दिन पर लक्ष्मी-गणेश जी के साथ-साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली बहुत महत्वपूर्ण पर्व है ,इसी दिन खाता-बही,कलम,तुला आदि पूजन किया जाता है। इसके साथ ही दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें। प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं। यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 08 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट से शुरू हो जाएगी और 09 नवंबर सोमवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
उदयातिथि के आधार पर कार्तिक अमावस्या तो 09 नवंबर को होगी, लेकिन अमावस्या तिथि में प्रदोष काल 08 नवंबर को प्राप्त हो रहा है, 09 नवंबर को प्रदोष काल के समय शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि लग जाएगी
इस वजह से इस साल दीपावली का त्योहार 08 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। 9 नवंबर को स्नान दान की सोमवती अमावस्या रहेगी। प्रदोष काल का मुहूर्त प्रदोष काल 08 नवंबर रविवार को सायं काल 5 बजकर 13 मिनट से 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जिसमें वृषभ काल (स्थिर लग्न) 5 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। लक्ष्मी पूजा का प्रदोष काल का मुहूर्त का समय सायं काल 5 बजकर 13 मिनट से सायं काल 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा
निशीथ काल का शुभ पूजा मुहूर्त श्री महालक्ष्मी पूजा के लिए यह निशीथ काल मुहूर्त भी अच्छा माना जाता है जोकि रात्रि 11 बजकर 17 मिनट से रात्रि 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। 4
गोर्वधन पूजा गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को करते हैं। इस दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गो माता की पूजा करने का विधान है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र के अहंकार को तोड़ा था। गोवर्धन पूजा के दिन को भगवान श्रीकृष्ण की जीत के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट मनाते हैं। इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 09 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31मिनट से प्रारंभ हो रही है। इस तिथि का समापन 10 नवंबर दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजे होगा