ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की हालिया तस्वीरों में उंगलियां सामान्य से मोटी सूजी हुई दिखाई दे रही हैं। इसके बाद से इसे लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। हाथ-पैरों और उंगलियों में सूजन के पीछे ठंड और शरीर में पानी जमा होना जैसी वजहें हो सकती हैं।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला की कुछ तस्वीरें इन दिनों खूब चर्चा में हैं। दोनों कैरेबियन देशों के दौरे पर हैं। इस दौरान सामने आई कुछ तस्वीरों में किंग चार्ल्स के हाथों और उंगलियों में सूजन देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर इससे 'सॉसेज फिंगर्स' कहा जा रहा है। गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब किंग चार्ल्स की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं। ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक रूप से इस समस्या के कारणों को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हाथों-उंगलियों में दिख रही इस सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। केंट में प्रैक्टिस करने वाली जनरल फिजिशियन डॉ
- स्टेफनी.डी जियोर्जियो एक रिपोर्ट में बताती हैं कि हाथ-पैरों में सूजन की समस्या काफी आम है। खासकर जब मौसम बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा होता है, तब इस तरह की परेशानी अधिक देखने को मिलती है। डॉक्टर बताती हैं, कई मरीज अक्सर ये शिकायत लेकर आते हैं कि उनके टखने सूज गए हैं, उंगलियों में पहनी अंगूठियां निकल नहीं रही हैं या दिन खत्म होते-होते उनके पैर पहले से ज्यादा मोटे दिखाई देने लगते हैं। ऐसी स्थिति में लोग घबरा जाते हैं और उन्हें लगता है कि कहीं उन्हें कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गई। हालांकि, ज्यादातर मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि शरीर में होने वाली सामान्य सूजन और किसी गंभीर बीमारी के संकेत के बीच अंतर कैसे पहचानें। साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि किस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ठंड के मौसम में क्यों बढ़ जाता है हाथ-पैर में सूजन? डॉ
- जियोर्जियो बताती हैं, जब तापमान कम होता है तो हमारा शरीर अपने अंदरूनी और जरूरी अंगों को गर्म रखने के लिए एक खास तरीका अपनाता है। इसके लिए हाथों, पैरों, उंगलियों और पंजों की खून की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे शरीर के बाहरी हिस्सों से गर्मी कम बाहर निकलती है और शरीर अपने जरूरी अंगों का तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है। लेकिन जब आप ठंड से निकलकर किसी गर्म जगह पर पहुंचते हैं, तो शरीर की ये सिकुड़ी हुई रक्त वाहिकाएं तेजी से फैलने लगती हैं। ऐसा होने पर हाथों और पैरों की तरफ अचानक खून का बहाव बढ़ जाता है। इस वजह से हाथ और पैर कुछ समय के लिए सूजे हुए या फूले हुए दिखाई दे सकते हैं। यह स्थिति उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल सकती है, जिन्हें रेनॉड्स डिजीज की समस्या होती है। रेनॉड्स एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ठंड लगने पर हाथों और पैरों की छोटी रक्त वाहिकाएं सामान्य से ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। इससे उंगलियों तक खून का पहुंचना कम हो जाता है। लेकिन जब दोबारा गर्मी मिलती है और खून का बहाव सामान्य होता है, तो हाथ-पैरों में अचानक सूजन महसूस हो सकती है। चिलब्लेन्स को हाथ-पैरों में सूजन की एक दूसरी वजह माना जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में ठंड के महीनों के दौरान लगभग हर 10 में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित होता है। इस समस्या में हाथों और पैरों की उंगलियों के सिरे सूज जाते हैं और उनमें दर्द महसूस होती है। कई बार प्रभावित हिस्से रंग लाल या बैंगनी हो सकता है। कई बार वहां जलन भी महसूस होती है, जैसे त्वचा में आग लग रही हो। दरअसल, ठंड के कारण त्वचा के आसपास की छोटी रक्त वाहिकाएं असामान्य रूप से सिकुड़ जाती हैं। इससे खून का बहाव प्रभावित होता है और त्वचा में सूजन, दर्द और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। महिलाओं में देखी जाती है ज्यादा दिक्कत डॉ
स्टेफनी.डी जियोर्जियो एक रिपोर्ट में बताती हैं कि हाथ-पैरों में सूजन की समस्या काफी आम है। खासकर जब मौसम बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा होता है, तब इस तरह की परेशानी अधिक देखने को मिलती है। डॉक्टर बताती हैं, कई मरीज अक्सर ये शिकायत लेकर आते हैं कि उनके टखने सूज गए हैं, उंगलियों में पहनी अंगूठियां निकल नहीं रही हैं या दिन खत्म होते-होते उनके पैर पहले से ज्यादा मोटे दिखाई देने लगते हैं। ऐसी स्थिति में लोग घबरा जाते हैं और उन्हें लगता है कि कहीं उन्हें कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गई। हालांकि, ज्यादातर मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि शरीर में होने वाली सामान्य सूजन और किसी गंभीर बीमारी के संकेत के बीच अंतर कैसे पहचानें। साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि किस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ठंड के मौसम में क्यों बढ़ जाता है हाथ-पैर में सूजन? डॉ
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
जियोर्जियो बताती हैं, जब तापमान कम होता है तो हमारा शरीर अपने अंदरूनी और जरूरी अंगों को गर्म रखने के लिए एक खास तरीका अपनाता है। इसके लिए हाथों, पैरों, उंगलियों और पंजों की खून की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे शरीर के बाहरी हिस्सों से गर्मी कम बाहर निकलती है और शरीर अपने जरूरी अंगों का तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है। लेकिन जब आप ठंड से निकलकर किसी गर्म जगह पर पहुंचते हैं, तो शरीर की ये सिकुड़ी हुई रक्त वाहिकाएं तेजी से फैलने लगती हैं। ऐसा होने पर हाथों और पैरों की तरफ अचानक खून का बहाव बढ़ जाता है। इस वजह से हाथ और पैर कुछ समय के लिए सूजे हुए या फूले हुए दिखाई दे सकते हैं। यह स्थिति उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल सकती है, जिन्हें रेनॉड्स डिजीज की समस्या होती है। रेनॉड्स एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ठंड लगने पर हाथों और पैरों की छोटी रक्त वाहिकाएं सामान्य से ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। इससे उंगलियों तक खून का पहुंचना कम हो जाता है। लेकिन जब दोबारा गर्मी मिलती है और खून का बहाव सामान्य होता है, तो हाथ-पैरों में अचानक सूजन महसूस हो सकती है। चिलब्लेन्स को हाथ-पैरों में सूजन की एक दूसरी वजह माना जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में ठंड के महीनों के दौरान लगभग हर 10 में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित होता है। इस समस्या में हाथों और पैरों की उंगलियों के सिरे सूज जाते हैं और उनमें दर्द महसूस होती है। कई बार प्रभावित हिस्से रंग लाल या बैंगनी हो सकता है। कई बार वहां जलन भी महसूस होती है, जैसे त्वचा में आग लग रही हो। दरअसल, ठंड के कारण त्वचा के आसपास की छोटी रक्त वाहिकाएं असामान्य रूप से सिकुड़ जाती हैं। इससे खून का बहाव प्रभावित होता है और त्वचा में सूजन, दर्द और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। महिलाओं में देखी जाती है ज्यादा दिक्कत डॉ
जियोर्जियो बताती हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में शरीर में पानी जमा होने यानी फ्लूइड रिटेंशन की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इसके पीछे हार्मोन भी एक बड़ी वजह हो सकते हैं। महिलाओं के शरीर में बनने वाला प्रोजेस्टेरोन हार्मोन शरीर में पानी को रोककर रखने की प्रवृत्ति बढ़ा सकता है। यही वजह है कि कई महिलाओं को पीरियड्स आने से लगभग दो सप्ताह पहले टखनों और पैरों में सूजन महसूस होने लगती है। मेनोपॉज की अवस्था के दौरान भी यह समस्या बढ़ सकती है। इस समय शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इससे शरीर में पानी और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अगर आप घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं और शरीर को ज्यादा नहीं हिलाते-डुलाते, तो भी हाथ-पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है। सूजन की ये समस्या कब हो सकती है खतरनाक? डॉक्टर के मुताबिक, अच्छी बात यह है कि ज्यादातर लोगों में ठंड के कारण होने वाली सूजन किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। आमतौर पर हाथ-पैरों में सूजन रातभर आराम करने के बाद कम हो जाती है।हालांकि कुछ स्थितियों में ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ
डी जियोर्जियो बताती हैं कि हार्ट फेलियर की समस्या में भी अक्सर लोगों में ये लक्षण देखे जाते रहे हैं। जब हृदय सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, तो खून और तरल पदार्थों का दबाव नसों में बढ़ जाता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों, खासकर हाथों और पैरों में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी तरह कई मामलों में ये समस्या किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण भी हो सकती है। हमारी किडनी खून को फिल्टर करके शरीर से अतिरिक्त पानी, सोडियम और दूसरे अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है।लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो ये तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं, इसके कारण भी सूजन की समस्या बढ़ जाती है। डॉक्टर बताती हैं कि किडनी से जुड़ी समस्या होने पर आमतौर पर पैरों, टखनों और पंजों में सूजन दिखाई देती है। इसके अलावा आंखों के आसपास भी सूजन हो सकती है। डीप वेन थ्रोम्बोसिस के कारण भी कई लोगों में ये परेशानी देखी जाती रही है। इसमें शरीर की किसी गहरी नस में खून का थक्का जम जाता है। यह थक्का खून के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है और कई बार गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए एक पैर में अचानक सूजन, दर्द होने पर तुरंत जांच जरूरी है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर किंग चार्ल्स-3 की समस्या की वजह को लेकर कोई जानकारी नहीं है। हालांकि डॉक्टर्स इसके लिए कई स्थितियों में जिम्मेदार मानते हैं। अगर आप भी इस तरह की दिक्कतों से परेशान हैं तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर जांच करा लें। ------------- नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।