हरियाणा में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था ही बदहाल है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- हरियाणा में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था ही बदहाल है। इसका नतीजा है कि खुले में कचरा डाला जाता है और खुलेआम इसे आग भी लगा दी जाती है। जुर्माना लगाने के बाद भी खुले में कचरा डालने और आग लगाने पर रोक नहीं लग पा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2023 से अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 16 शहरी निकायों और आठ निजी एजेंसियों पर 52.36 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद प्रदेश में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाई है।
- पर्यावरण अनुसंधान पर काम करने वाले संगठन एनवायर कैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, कचरे का निस्तारण घर से ही शुरू होना चाहिए। गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है। गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाएं, सूखे कचरे की रिसाइक्लिंग हो और बाकी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निस्तारण किया जाए। खुले में कचरा जलाना पूरी तरह बंद होना चाहिए।
- कूड़े की आग में घुल रहा जहर, हवा से पानी तक खतरा
पर्यावरण अनुसंधान पर काम करने वाले संगठन एनवायर कैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, कचरे का निस्तारण घर से ही शुरू होना चाहिए। गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है। गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाएं, सूखे कचरे की रिसाइक्लिंग हो और बाकी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निस्तारण किया जाए। खुले में कचरा जलाना पूरी तरह बंद होना चाहिए।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
कूड़े की आग में घुल रहा जहर, हवा से पानी तक खतरा
पीजीआई चंडीगढ़ में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ
रविंद्र खैवाल के मुताबिक घरेलू कचरे में प्लास्टिक, रबर और रसायन जलने से पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले धुएं का उत्सर्जन होता है। औद्योगिक कचरे से भारी धातुएं और रासायनिक प्रदूषक मिट्टी व भूजल में पहुंच सकते हैं। ई-वेस्ट को खुले में जलाने या तोड़ने से सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व निकलते हैं। इनसे फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र और आंखों पर गंभीर असर पड़ सकता है।