सुप्रीम कोर्ट: मीडिया ट्रायल पर अभिषेक बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट को याचिका पर विचार करने का निर्देश
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट: मीडिया ट्रायल पर अभिषेक बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट को याचिका पर विचार करने का निर्देश
मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने कहा कि अभिषेक बनर्जी हाईकोर्ट दोबारा खुलने पर अपनी याचिका को सुनवाई के लिए रखवा सकते हैं। दुर्गा पूजा और दिवाली की छुट्टियों के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट 16 नवंबर को खुलेगा। अदालत ने हाईकोर्ट से बनर्जी की याचिका पर विचार करने को कहा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर उनकी मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। हाईकोर्ट में अब तक सुनवाई क्यों नहीं हो सकी? बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई केवल एक बार हुई थी। उस दौरान याचिकाकर्ता को बताया गया कि संबंधित पीठ के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसके बाद उन्होंने तीन बार मामले को सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया। लेकिन याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। अधिवक्ता ने कहा कि इस बीच बनर्जी के अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में कह चुका है कि मीडिया ट्रायल के कारण किसी व्यक्ति को निर्दोष मानने का अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता। जांच से जुड़ी जानकारी लीक करने का क्या है आरोप? अभिषेक बनर्जी कई मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां तलाशी, पूछताछ और कानूनी कार्रवाई से जुड़ी जानकारियां मीडिया के एक वर्ग को दे रही हैं। उनके अनुसार, जांच अधिकारी की ओर से चुनिंदा जानकारियां लीक की जा रही हैं। इसके बाद अलग-अलग समाचार पत्रों में उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित हुई हैं। बनर्जी का कहना है कि ऐसी खबरों से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इससे उनके खिलाफ चल रही जांच भी प्रभावित हो सकती है। बनर्जी ने अदालत से क्या मांग की है? बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच एजेंसियों को उनकी निजी जानकारी मीडिया से साझा करने से रोकने की मांग की है। उन्होंने मीडिया संस्थानों को भी जांच से जुड़े मामलों पर खबरें प्रकाशित करने से रोकने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों की ओर से जानबूझकर जानकारी लीक करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। इस अनुच्छेद में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है। बनर्जी ने कहा है कि इससे उनकी गरिमा, प्रतिष्ठा और निष्पक्ष जांच का अधिकार प्रभावित हो रहा है। अब कलकत्ता हाईकोर्ट उनकी याचिका और अंतरिम राहत की मांग पर विचार करेगा।