सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फ़ीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा होती हैं.
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- 'ग्रीन पटाखे' राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज हैं जो पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है
- नीरी एक सरकारी संस्थान है, जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंदर आता है
- ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है
नीरी एक सरकारी संस्थान है, जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंदर आता है
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है
सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फ़ीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा होती हैं
नीरी के चीफ़ साइंटिस्ट डॉक्टर साधना रायलू का कहना है कि इनसे हानिकारक गैसें हम निकलती हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इनसे प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डॉक्टर साधना बताती हैं कि सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फ़र गैस निकलती है, लेकिन उनके शोध का लक्ष्य इनकी मात्रा को कम करना था
ग्रीन पटाखों में इस्तेमाल होने वाले मसाले बहुत हद तक सामान्य पटाखों से अलग होते हैं
नीरी ने कुछ ऐसे फ़ॉर्मूले बनाए हैं जो हानिकारक गैस कम पैदा करेंगे
डॉक्टर साधना बताती हैं कि उनके संस्थान ने ऐसे फॉर्मूले तैयार किए हैं जिसके जलने के बाद पानी बनेगा और हानिकारक गैसों में घुल जाएगा
इन ग्रीन पटाखों की बेहद ख़ास बात है जो सामान्य पटाखों से उन्हें अलग करती है