अभी धनतेरस और फिर शादियों का मौसम शुरू होगा. सोने और चांदी की ख़रीदारी इन मौक़ों पर ख़ूब होती हैं. बदलती वैश्विक परिस्थिति में महंगे मेटल्स के साथ क्या हो सकता है?
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- शुक्रवार को सोने की क़ीमतें एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं, जबकि चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की क़ीमतों में भारी गिरावट आई
- ये तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड के दायरे में पहुँच गईं
- यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ख़र्च से पर्याप्त रिटर्न मिलने को लेकर चिंताओं के बीच टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई
ये तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड के दायरे में पहुँच गईं
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ख़र्च से पर्याप्त रिटर्न मिलने को लेकर चिंताओं के बीच टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई
सोने और चांदी, दोनों में लगातार दूसरे महीने नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया गया
कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंताओं ने क़ीमती धातुओं के बाज़ार पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डीएचएफ कैपिटल के बास कूइजमैन ने एक नोट में कहा है, "मौद्रिक नीति सख़्त होने की उम्मीदों का दबाव उन एसेट्स पर बना हुआ है, जिनसे कोई ब्याज या नियमित आय नहीं मिलती."
उन्होंने कहा, "तेल की क़ीमतों में मज़बूती से महंगाई लंबे समय तक ऊंची बने रहने की चिंताएं बढ़ रही हैं, जिससे दबाव और गहरा हो रहा है."
तेल की क़ीमतों में गिरावट से सोने पर दबाव कम हो सकता है
वहीं, सप्लाई चेन में और अड़चन आने या अमेरिका में अक्तूबर महीने के रोज़गार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने पर सख़्त मौद्रिक नीति की संभावना और मज़बूत हो सकती है
इससे सोने की क़ीमतों पर दबाव बना रह सकता है