सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं हो सकती।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं हो सकती।
- पति-पत्नी के बीच झगड़ा गर्भपात का आधार नहीं (फोटो-पीटीआई)
- वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट।
पति-पत्नी के बीच झगड़ा गर्भपात का आधार नहीं (फोटो-पीटीआई)
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट।
6 माह से अधिक की गर्भावस्था मामले में सुनवाई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक महिला ने 6 महीने से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति मांगी है। महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
वहीं महिला पति ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अजन्मे बच्चे पर उसका भी अधिकार है। इस मामले में कोर्ट ने कहा, 'सिर्फ वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं हो सकती। इससे समाज किस दिशा में जाएगा।'
महादेवन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि बलात्कार या यौन उत्पीड़न के मामलों में, या फिर भ्रूण में कोई समस्या होने पर गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह मामला बिल्कुल अलग है।
कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोई महिला सिर्फ इसलिए गर्भपात का फैसला ले ले कि उसके पति और ससुराल वालों ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया है या उसे प्रताड़ित किया है, तो समाज किस दिशा में जाएगा?
कोर्ट ने महिला को समझाते हुए कहा, 'पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे के खिलाफ बातें होना आम बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस आधार पर गर्भावस्था को समाप्त कर दिया जाए।'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'यह यौन उत्पीड़न का मामला नहीं है और न ही यह किसी अकेली महिला के गर्भवती होने का मामला है। अगर कोई पत्नी अपने पति और ससुराल वालों के साथ झगड़े के कारण गर्भपात कराना चाहे, तो समाज के तौर पर हम किस दिशा में जा रहे हैं..