तमिलनाडु में अलग राज्य ध्वज को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मंत्री आधव अर्जुन के बयान कि तमिलनाडु का अपना ध्वज होगा और तमिल भाषा अनिवार्य होनी चाहिए।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- तमिलनाडु में अलग राज्य ध्वज को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मंत्री आधव अर्जुन के बयान कि तमिलनाडु का अपना ध्वज होगा और तमिल भाषा अनिवार्य होनी चाहिए।
- मंत्री आधव अर्जुन ने तमिलनाडु के अलग ध्वज की घोषणा की।
- भाजपा ने इसे अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला बताया।
मंत्री आधव अर्जुन ने तमिलनाडु के अलग ध्वज की घोषणा की।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
भाजपा ने इसे अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला बताया।
भाषा नीति पर भी भाजपा ने मंत्री के बयान पर सवाल उठाए।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में अलग राज्य ध्वज को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। राज्य मंत्री आधव अर्जुन ने घोषणा की कि तमिलनाडु का अपना राज्य ध्वज होगा।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
उनके इस बयान पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया और इसे अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला कदम करार दिया है।
मंत्री आधव अर्जुन ने अपने बयान में कहा, ' देश के कई राज्यों के पास अपना ध्वज है, लेकिन तमिलनाडु के पास कोई ध्वज नहीं है। तमिलनाडु के लिए एक राज्य ध्वज लाया जाएगा। साथ ही आधव अर्जुन ने दो भाषा नीति को जरूरी बताते हुए कहा, 'हमें स्कूली दिनों से ही अपनी मातृभाषा तमिल को प्राथमिकता देनी होगी।'
उन्होंने कहा, 'अंग्रेजी सिर्फ कारोबार की भाषा है। चीन, जापान और फ्रांस में लोग अपनी ही भाषा में बात करते हैं। तमिल कोई ऐसी भाषा नहीं होनी चाहिए जिसे चुनने का विकल्प हो, इसे अनिवार्य होना चाहिए।'
मंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता विनोझ पी
सेल्वम ने सोशल साइट X पर कहा, ' इस तरह की बयानबाजी अलगाववादी सोच को हवा देती है। यह लोगों को अपनी तमिल पहचान और भारतीय पहचान को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में देखने के लिए उकसाती है। जब हमें दोनों पर गर्व होना चाहिए, तो समाज में विभाजन क्यों पैदा किया जा रहा है?'