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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

नेतन्याहू की सियासी घेराबंदी, इसराइली सत्ता की चाबी अरब पार्टियों के हाथ: द लेंस

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: रवि, 1 नव॰ 2026, 04:57 am
समाचार एजेंसी BBC Hindi
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नेतन्याहू की सियासी घेराबंदी, इसराइली सत्ता की चाबी अरब पार्टियों के हाथ: द लेंस
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अरब पार्टियों के कई नेता खुलकर कह रहे हैं कि नेतन्याहू को उनके पद से हटाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • इसराइल में 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद ग़ज़ा, लेबनान और ईरान में हुए युद्ध के बाद पहली बार आम चुनाव हुए हैं.
  • 27 अक्तूबर को हुए इस चुनाव को प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा था
  • लेकिन इस जनमत संग्रह का परिणाम साफ़ नहीं आया यानी कि इसराइली संसद में किसी को बहुमत नहीं मिला-न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही विपक्ष को

27 अक्तूबर को हुए इस चुनाव को प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा था

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

लेकिन इस जनमत संग्रह का परिणाम साफ़ नहीं आया यानी कि इसराइली संसद में किसी को बहुमत नहीं मिला-न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही विपक्ष को

इसके बजाय अरब पार्टियों के गठबंधन को लोगों की उम्मीद से बेहतर सफलता मिली है. 120 सदस्यों वाली संसद में उनके 19 सदस्य जीतकर आए हैं.

53 सीटों के साथ नेतन्याहू गुट और 48 सीटों के साथ विपक्षी गादी आइज़नकोट वाला गठबंधन बहुमत के लिए ज़रूरी 61 सीटों के आंकड़े से पीछे हैं

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

ऐसे में अरब मूल की पार्टियों की राजनीतिक भूमिका अहम हो गई है

और वे नेतन्याहू को हटाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं

इन चुनावी नतीजों का असर सिर्फ़ इसराइल की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहने वाला है

इसका सीधा असर फ़लस्तीनियों की ज़िंदगी पर भी पड़ सकता है

हालांकि ग़ज़ा को लेकर आइज़नकोट का रुख़ भी नेतन्याहू से बहुत अलग नहीं है

रिपोर्टिंग स्रोत: BBC Hindi मूल रिपोर्ट देखें

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