बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान की एक टीम ने उन शहरों में हवा की गुणवत्ता पर एक स्टडी की है, जिन्हें अवॉर्ड मिले लेकिन वहां एक्यूआई में सुधार नहीं दिखा.
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस (आईआईएससी) की एक टीम ने हवा की गुणवत्ता को लेकर एक विश्लेषण किया है जो उन शहरों के बारे में है, जिन्हें साफ़ हवा के लिए उठाए गए कदम के लिए पुरस्कार मिले हैं
- इसमें कहा गया है कि सिर्फ़ पुरस्कार मिल जाने से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि उन शहरों के लोग साफ़ हवा में सांस ले रहे हैं
- अच्छे एक्यूआई के लिए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में कुल 10 शहरों को पुरस्कार दिए गए
इसमें कहा गया है कि सिर्फ़ पुरस्कार मिल जाने से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि उन शहरों के लोग साफ़ हवा में सांस ले रहे हैं
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
अच्छे एक्यूआई के लिए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में कुल 10 शहरों को पुरस्कार दिए गए
इनमें तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों से लेकर 10 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहर तक शामिल थे
ये अवॉर्ड पिछले पाँच साल से दिए जा रहे हैं
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
इस अवॉर्ड का मक़सद उन 131 शहरों को हवा सुधारने के लिए प्रोत्साहित करना था, जो 2011 से 2015 के दौरान नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (एनएएक्यूएस) को पूरा करने में नाकाम रहे थे
हालांकि, भारतीय विज्ञान संस्थान की स्टडी में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत अपनाए गए सिस्टम और अवॉर्ड देने के मानदंड पर सवाल उठाए गए हैं
आईआईएससी की सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन लैब के संयोजक प्रोफ़ेसर आशीष वर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "मौजूदा कार्यप्रणाली वास्तविक प्रदूषण के स्तर का आकलन नहीं करती है
इसका ज़्यादा ध्यान इस बात पर होता है कि प्रशासन ने तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं."
दरअसल, इस मूल्यांकन के तरीक़े में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से जारी किया जाने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) भी शामिल नहीं किया जाता