भारत भर में कई चौंकाने वाली घटनाएं हुईं, जहां चिकित्सा पेशेवरों या अधिकारियों द्वारा मृत घोषित किए गए व्यक्तियों को बाद में जीवित पाया गया।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- भारत भर में कई चौंकाने वाली घटनाएं हुईं, जहां चिकित्सा पेशेवरों या अधिकारियों द्वारा मृत घोषित किए गए व्यक्तियों को बाद में जीवित पाया गया।
- तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
- सात साल पहले मृत महिला जिंदा मिली, आरोपी जेल काट चुके।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
सात साल पहले मृत महिला जिंदा मिली, आरोपी जेल काट चुके।
अंतिम संस्कार से पहले मृत घोषित व्यक्ति ने ली सांस, डॉक्टर निलंबित।
अस्पताल ने मृत बताया, घर पर जिंदा मिला मरीज, जांच के आदेश।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें लोगों को पहले मृत घोषित किया जा चुका है लेकिन वह जीवित हैं। इस तरह घटनाओं ने मेडिकल लापरवाही, पहचान में गलती और अस्पताल की प्रक्रियाओं में खामियों पर बार-बार सवाल खड़े किए हैं।
सात साल पहले मृत मान ली गई एक महिला के जीवित मिलने से लेकर, अंतिम संस्कार या दफनाने से ठीक पहले मरीजों के होश में आ जाने तक भारत में ऐसी कई घटनाओं ने परिवारों को चौंका दिया है और इन मामलों में जांच की नौबत आ गई है। कुछ मामलों में अस्पतालों की क्लर्कियल (दफ्तरी) गलतियां सामने आईं तो कुछ मामलों में किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर ही सवाल उठ खड़े हुए।
आइए, ऐसी ही कुछ घटनाओं पर नजर डालते हैं, जिनमें मृत घोषित किए गए लोग बाद में जीवित पाए गए।
एक अजीबोगरीब मामले में मेहंदीपुर बालाजी पुलिस ने शनिवार को एक ऐसी महिला को हिरासत में लिया, जिसे सात साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था। इस मामले में दो लोगों को उसकी हत्या का आरोपी ठहराया गया था और वे इसके लिए जेल की सजा भी काट चुके हैं।
पुलिस ने आरती नाम की इस महिला का पता तब लगाया, जब उन्हें कुछ लोगों से उसके ठिकाने के बारे में जानकारी मिली। मेहंदीपुर बालाजी पुलिस स्टेशन के अधिकारी अजीत सिंह बडसेरा के अनुसार, सोनू ने बताया कि उसने 2015 में आरती से कोर्ट मैरिज की थी।