कर्नाटक में SIR के बाद भी मतदाता सूचियों में गड़बड़ी मिली है, जिसमें एक ही मतदाता के दो वोटर आईडी कार्ड सामने आए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आवेदनों की प्रक्रिया में हुई खामियों को स्वीकार करते हुए सुधार के लिए भेजा है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- कर्नाटक में SIR के बाद भी मतदाता सूचियों में गड़बड़ी मिली है, जिसमें एक ही मतदाता के दो वोटर आईडी ...और पढ़ें
- SIR के बाद कर्नाटक मतदाता सूचियों में मिली गड़बड़ी।
- एक ही मतदाता के दो वोटर आईडी कार्ड सामने आए।
SIR के बाद कर्नाटक मतदाता सूचियों में मिली गड़बड़ी।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
एक ही मतदाता के दो वोटर आईडी कार्ड सामने आए।
सीईओ ने खामी स्वीकार कर सुधार के निर्देश दिए।
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी मिली हैं।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के बाद दो अलग-अलग जगह की मतदाता सूचियों में एक ही मतदाता के नाम और डुप्लिकेट वोटर आईडी नंबर सामने आए हैं। ये मामला दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का है। इस गलती के सामने आने के बाद से चुनाव आयोग ज्यादा सतर्क हो गया है।
सीईओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी ) ने आवेदनों की प्रक्रिया में हुई खामियों को स्वीकार किया है। इसको लेकर एक स्पष्टीकरण शनिवार को जारी किया गया। इस स्पष्टीकरण में सीईओ ऑफिस से बताया गया कि मतदाता आवेदनों को संभालने में हुई दो अलग-अलग गलतियों के कारण ये मामला सामने आया है।
पहले मामले में, कुछ आवेदकों ने एसआईआर के दौरान 'सिटिजन सर्विस पोर्टल' के माध्यम से एक से अधिक 'फॉर्म 6' जमा कर दिए। चूंकि हर आवेदन को अलग-अलग प्रोसेस किया गया, इसलिए अनजाने में एक ही मतदाता के लिए कई एपिक नंबर (इलेक्टर फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जनरेट हो गए।
दूसरा मामला उन लोगों से जुड़ा है जिन्होंने घर बदल लिया। जिन मतदाताओं ने अपना निवास स्थान एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में बदल लिया उनका विधानसभा क्षेत्र भी बदल गया। हालांकि, पता बदलने के लिए उनके 'फॉर्म 8' आवेदनों को मंजूरी मिल गई और उनके नाम नए विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में जुड़ गए, लेकिन पुराने विधानसभा क्षेत्र से नाम हटाने के लिए दिए गए 'फॉर्म 7' आवेदन लंबित रह गए। इसके परिणामस्वरूप, उनके नाम दोनों जगहों की मतदाता सूचियों में दिखाई देने लगे।
अब इन मामलों को जिला निर्वाचन अधिकारियों, अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के पास भेज दिया गया है, ताकि वे कानून के अनुसार इनकी जांच कर सकें और आवश्यक सुधार कर जरूरी कार्रवाई कर सकेंगे। बता दें कि सीईओ दफ्तर से मिले स्पष्टीकरण में यह नहीं बताया गया कि कितने मतदाता प्रभावित हुए और सुधार कब किए जाएंगे।