1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों और सिख संगठनों ने 1 नवंबर को इंडी गठबंधन की रैली के समय पर सवाल उठाए, जिसे वे 'काला दिन' मानते हैं।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों और सिख संगठनों ने 1 नवंबर को इंडी गठबंधन की रैली के समय पर सवाल उठाए, जिसे वे 'काला दिन' मानते हैं।
- रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली। (फोटो- पीटीआई।)
- 1984 दंगा पीड़ितों ने 1 नवंबर रैली पर आपत्ति जताई।
रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली। (फोटो- पीटीआई।)
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
1984 दंगा पीड़ितों ने 1 नवंबर रैली पर आपत्ति जताई।
सिख समुदाय ने कांग्रेस से माफी की मांग की।
पीड़ितों ने न्याय और पुनर्वास की मांग दोहराई।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों और सिख संगठनों ने रविवार को कांग्रेस के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसके तहत 1 नवंबर को इंडी गठबंधन की रैली आयोजित की गई थी।
2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस रैली के समय ने बीजेपी को कांग्रेस के खिलाफ एक राजनीतिक मुद्दा भी दे दिया। इस दिन पश्चिमी दिल्ली में बीजेपी द्वारा एक विरोध मार्च निकाला गया, जिसमें पीड़ितों के समूहों ने अपनी आपत्ति जताई और एक बार फिर न्याय की मांग की।
पश्चिमी दिल्ली में सिख समुदाय के लोगों और पीड़ितों ने हरि नगर से तिलक नगर तक एक मार्च निकाला। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी से माफी की मांग की। इस मार्च में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ वकील एच.एस
फूलका शामिल हुए। फूलका दशकों से दंगों के पीड़ितों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
रैली से पहले फूलका ने कहा था, "1 नवंबर न केवल सिखों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक काला दिन है। उन्हें (कांग्रेस को) भी इसे काले दिन के रूप में मनाना चाहिए और शर्म से अपना सिर झुका लेना चाहिए।" 1984 दंगा पीड़ित कल्याण सोसाइटी' ने भी रैली के समय पर आपत्ति जताई।